हरतालिका तीज कब है ? 1 या 2 सितम्बर || Hartalika Teej 2019

हरतालिका तीज

हरतालिका तीज 1 सितंबर या 2 सितंबर में से किस तारीख को मनाई जाएगी, इस बात को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। कुछ लोग 1 सितंबर की तारीख बता रहे हैं तो कुछ 2 सितंबर की तारीख को सही बता रहे हैं।  हिन्दी पंचांग के अनुसार, हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।

हरतालिका तीज की तिथ‍ि और शुभ मुहूर्त

तृतीया प्रारंभ: 01 सितंबर 2019 को सुबह 08 बजकर 27 मिनट से.

तृतीया समाप्‍त: 02 सितंबर 2019 को सुबह 4 बजकर 57 मिनट तक.

उपर दी तिथि के अनुसार तृतीया दो दिनों के मध्य आ रही है | ऐसे में ज्योतिष विद्वानों का मानना है कि हरतालिका तीज का व्रत 1 सितंबर की बजाए 2 सितंबर को रखा जाना चाहिए. उनके अनुसार चतुर्थी युक्‍त तृतीया को बेहद सौभाग्‍यवर्द्धक माना जाता है. ऐसे में 2 सितंबर को हस्त नक्षत्र का उदयातिथि योग और सायंकाल चतुर्थी तिथि की पूर्णता तीज पर्व के लिए सबसे उपयुक्‍त है|

अतः ज्योतिष विद्वानों के अनुसार हरतालिका तीज 2 सितंबर को ही मनाई जानी चाहिए |

क्या है हरतालिका तीज : भारत में कई पर्व उनसे सम्बंधित व्रतो की वजह से मनाये जाते है | उनमे से एक है हरतालिका तीज | हरताल‍िका तीज (Hartalika Teej 2019) की महिमा हरयाली तीज या कजरी तीज से कम नहीं है | हिन्‍दू धर्म में विशेषकर सुहागिन महिलाओं के लिए इस पर्व का महत्व बहुत ज्‍यादा है |

हरताल‍िका तीज का व्रत बहुत ही कठिन है इस दिन महिलाये प्रात: स्नान करके शिव व् पार्वती के पूजन के साथ शरू करती है और दिन व् रात भर बिना किसी अन्न जल के व्रत करती है यही नहीं रात के समय महिलाएं जागरण करती हैं और अगले दिन सुबह विधिवत्त पूजा-पाठ करने के बाद ही व्रत खोलती हैं |

हरतालिका तीज महत्त्व :

हरताल‍िका तीज व्रत को करवा चौथ के व्रत के सामान पति की आयु बढानें वाला माना जाता है |

हरतालिका तीज की पूजन विधि

हरतालिका तीज की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. प्रदोष काल यानी कि दिन-रात के मिलने का समय. हरतालिका तीज के दिन इस प्रकार शिव-पार्वती की पूजा की जाती है:

– संध्‍या के समय फिर से स्‍नान कर साफ और सुंदर वस्‍त्र धारण करें और सोलह श्रृंगार करे |

– इसके बाद गीली मिट्टी अथवा गाय के गोबर से शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा बनाएं |

– दूध, दही, चीनी, शहद और घी से पंचामृत बनाएं |

– सुहाग की सामग्री को अच्‍छी तरह सजाकर मां पार्वती को अर्पित करें |

– शिवजी को वस्‍त्र अर्पित करें |

– अब हरतालिका व्रत की कथा सुनें |  

– इसके बाद सबसे पहले गणेश जी और फिर शिवजी व माता पार्वती की आरती उतारें |

– अब भगवान की परिक्रमा करें |

– रात को जागरण करें. सुबह स्‍नान करने के बाद माता पार्वती का पूजन करें और उन्‍हें सिंदूर चढ़ाएं|

– फिर फल और हल्‍वे अथवा लड्डू का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद फल खाकर व्रत पारण करें |

– सभी पूजन सामग्री को एकत्र कर किसी सुहागिन महिला को दान दें |

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